कवर्धा में दिनांक 15-12-2017 समय 12 बजे, ग्राम-तरेगांव वन परिक्षेत्र-तरेगांव, ब्लाक एवं तहसील-तरेगांव जिला-कबीरधाम (छ.ग.) में तेंदुपत्ता बोनस तिहार मनाने डा. रमन सिंह ने एक सभा लिया था जिसमे डा. रमन सिंह के अनुसार लगभग 50 हजार जनता डा. रमन सिंह के भाषण सुनने अपने गाड़ी से ग्राम-तरेगांव वन परिक्षेत्र-तरेगांव, ब्लाक एवं तहसील-तरेगांव जिला-कबीरधाम (छ.ग.) पहुंचे थे. जिस पर कुछ लोगों द्वारा यह कहा गया कि वन प्रबंधन समिति के धन से वनग्राम के लोगों को गाड़ी में बैठाकर खाना, नास्ता व चाय, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट, खिलाते-पिलाते लाया गया था. चूँकि मामला मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से जुड़ा है और अगर बिना गाड़ी में बैठाकर खाना, नास्ता व चाय, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट, खिलाते-पिलाते यदि डा. रमन सिंह का भाषण सुनने और तेंदुपत्ता बोनस तिहार मनाने के लिए लगभग 50 हजार की जनता स्वत: संज्ञान में लेकर ग्राम-तरेगांव वन परिक्षेत्र-तरेगांव, ब्लाक एवं तहसील-तरेगांव जिला-कबीरधाम (छ.ग.) में पहुंची है तो ये मायने निकाला जा सकता है कि डा. रमन सिंह भारत में नरेन्द्र मोदी के बाद दुसरे नम्बर के सबसे बड़े नेता होंगे इसकी सच्चाई जानने जब मैंने (अनिल अग्रवाल) सूचना का अधिकार के तहत कार्यालय वनमंडल – कवर्धा को अपने पत्र क्रमांक 1717-4-2-76, दिनांक 16-12-2017 व क्रमांक 1717-4-2-75, दिनांक 16-12-2017 से जानकारी चाही तो कार्यालय वन परिक्षेत्र अधिकारी कवर्धा ने अपने पत्र क्रमांक 18, दिनांक 03-01-2018 ने लेख किया कि संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के ग्रामीणों को उनके निवास से कार्यक्रम स्थल तक लाने ले जाने एवं अन्य व्यवस्था हेतु इस कार्यालय के किसी भी कर्मचारी की ड्यूटी नहीं लगाईं गई थी और न ही किसी भी प्रकार का पत्राचार किया गया था. इसके अतिरिक्त कार्यालय वन परिक्षेत्र अधिकारी कवर्धा (छ.ग.) ने अपने पत्र क्रमांक 20, दिनांक 03-01-2018 के माध्यम से अध्यक्ष / सचिव, संयुक्त वन प्रबंधन समिति – हाथीडोब, मन्नाबेदी, कटगो, सिंघनपुरी, मंडलाकोनहा, कापा, केशदा, झंडी, महराजपुरडीह, दियाबार, थुहापानी, खिरसाली, घोंघा, रजपुरा, भण्डार, भीरा, सुकवापरा, बैरख, शक्तिपानी, आमानारा, अमलीटोला, चोरभट्टी, पालक, रानीदरहा, राजाढार, जामपानी ने मेरे आवेदन पर परीक्षण उपरांत वन प्रबंधन समितियों से कार्यवाही हेतु जानकारी देने के लिए लेख किया है

 

सूचना के अधिकार अधिनियम के धारा 4 के तहत अध्यक्ष / सचिव, संयुक्त वन प्रबंधन समिति – हाथीडोब, मन्नाबेदी, कटगो, सिंघनपुरी, मंडलाकोनहा, कापा, केशदा, झंडी, महराजपुरडीह, दियाबार, थुहापानी, खिरसाली, घोंघा, रजपुरा, भण्डार, भीरा, सुकवापरा, बैरख, शक्तिपानी, आमानारा, अमलीटोला, चोरभट्टी, पालक, रानीदरहा, राजाढार, जामपानी में सूचना के अधिकार का बोर्ड और जनसूचना अधिकारी का नाम अधिनियम के लागू होने से 120 दिन के अन्दर वेबसाइड में प्रदर्शित रहना चाहिए जिससे की आम जनता अध्यक्ष / सचिव, संयुक्त वन प्रबंधन समिति – हाथीडोब, मन्नाबेदी, कटगो, सिंघनपुरी, मंडलाकोनहा, कापा, केशदा, झंडी, महराजपुरडीह, दियाबार, थुहापानी, खिरसाली, घोंघा, रजपुरा, भण्डार, भीरा, सुकवापरा, बैरख, शक्तिपानी, आमानारा, अमलीटोला, चोरभट्टी, पालक, रानीदरहा, राजाढार, जामपानी के लेखा एवं आय-व्यय को देख सके. सूचना के अधिकार को लागू हुए 12 वर्ष हो गए परन्तु अभी तक वन विभाग ने सूचना के अधिकार की धारा 4 को अभी तक लागू नहीं किया है और न ही 120 वर्ष तक लागू करने का कोई इरादा भी नजर नहीं आ रहा है.

 

डा. रमन सिंह एक तरफ पारदर्शिता और डिजिटल इण्डिया की बात करते हैं पर उनके दिनांक 15-12-2017 के  ग्राम-तरेगांव वन परिक्षेत्र-तरेगांव, ब्लाक एवं तहसील-तरेगांव जिला-कबीरधाम (छ.ग.)  में  हुए कार्यक्रम पर व्यय को लेकर तरह-तरह की बात उठ रही है. जिस पर डा. रमन सिंह को दिनांक 15-12-2017 को हुए आयोजन के व्यय का पाई-पाई का हिसाब जनता को सार्वजानिक किया जाना चाहिए. वैसे तो आज नहीं तो कल दिनांक 15-12-2017 को हुए व्यय की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिल जाएगी जिसके लिए कार्यालय वनमंडलाधिकारी कवर्धा, वनमंडल- कवर्धा (छ.ग.) के पत्र क्रमांक व्ययलेखा II / 16875 कवर्धा, दिनांक 22-12-2017 को जनसूचना अधिकारी एवं परिक्षेत्र अधिकारी कवर्धा, तरेगांव, खारा, रेंगाखार, स.लोहारा, पंडरिया पूर्व, पंडरिया पश्चिम, भोरमदेव अभ्यारण कवर्धा / चिल्फी तथा कार्यालय वनमंडलाधिकारी कवर्धा, वनमंडल- कवर्धा (छ.ग.) के पत्र क्रमांक व्ययलेखा II / 16873 कवर्धा, दिनांक 22-12-2017 को जनसूचना अधिकारी एवं परिक्षेत्र अधिकारी कवर्धा, तरेगांव, खारा, रेंगाखार, स.लोहारा, पंडरिया पूर्व, पंडरिया पश्चिम, भोरमदेव अभ्यारण कवर्धा / चिल्फी को जानकारी प्रदाय करने के निर्देश दिए हैं. कवर्धा जिले के नागरिकों से आग्रह है कि अगर उनके पास ­­­­­­­­­­­­­डा. रमन सिंह के दिनांक 15-12-2017 के ग्राम-तरेगांव वन परिक्षेत्र-तरेगांव, ब्लाक एवं तहसील-तरेगांव जिला-कबीरधाम (छ.ग.) के कार्यक्रम में हुए व्यय की कोई जानकारी हो तो उसे सोशल मिडिया के माध्यम से सार्वजनिक करें तथा मुझे भी उसकी जानकारी देवें.     

बारनवापारा स्थित वनग्राम में शासन से प्राप्त राशि का किस तरह से दुरूपयोग होता है उसे किसी को बताने की आवश्यकता नही इसी कारण गत 10 वर्ष में बारनवापारा अभ्यारण में करोडो रूपये खर्च होने के बाद भी बारनवापारा अभ्यारण के रेस्ट हॉउस के कमरे खाली रहते है जबकि बार के बाजु ग्राम में बने निजी रेस्ट हॉउस के कमरे हमेशा हाउसफुल रहते है बारनवापारा अभ्यारण परिक्षेत्र में वनों के संरक्षण एवं पथ वृक्षारोपण के विस्थापित ग्राम नवापारा में वित्तीय वर्ष 2016-17 में 6 किलोमीटर लंबा घास, चरौटा, खखरी की कटाई कर क्षेत्र से बाहर ले जाकर जलाने के नाम पर 16,450 रुपये का भुगतान 7 मजदूरों को 10 दिन कराना बताकर फर्जीवाड़ा किया गया था इसी प्रकार बारनवापारा अभ्यारण परिक्षेत्र में अखाद्य घास उन्मूलन कार्य जो कि 5 हेक्टेयर तथा कक्ष क्र. एफ.डी. 164 में सर्वे सीमांकन का कार्य तथा आसपास के वन क्षेत्र में पड़ी गीली-सुखी लकड़ियों को लाना तथा गड्डो में गडाना बताकर 20,563 रूपये का भुगतान किया गया है जबकि वास्तव में 20,563 रूपये का कार्य नही किया गया है जोकि कार्य क्षेत्र में जाने से प्रमाणित होता है इसी प्रकार 19,388 रूपये का भी कार्य बताया गया है जबकि 19,388 रूपये का कार्य नहीं करवाया गया है वन परिक्षेत्र अधिकारी बारनवापारा अभ्यारण में 12 श्रमिकों के द्वारा ग्राम हरदी में बाऊन्ड्री डिमार्केशन कार्य के लिए वाउचर नंबर 46, दिनांक 8-3-2017 से सीमा लाईन, कटाई, जलाई में 13 किलोमीटर में 12,284 रूपये का निरर्थक व्यय बताया गया है जबकि ऐसा कोई कार्य वहां दिखाई नहीं पड़ता तथा वाउचर नं 47, दिनांक 8-3-2017 द्वारा बाउंड्री डिमार्केशन के लिये 6,991 रूपये का निरर्थक व्यय किया गया था इन प्रमाणकों में वैसे तो सभी के सील एवं हस्ताक्षर हैं परन्तु मौके में 6,991 रूपये का कार्य नही हुआ है स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक सरहदी लाइन की कटाई-सफाई कार्य के लिए तेंदुचुवा बीट में 3 किलोमीटर का कार्य बताकर प्रमाणक क्र. 48, दिनांक 8-3-2017 के माध्यम से 7,050 रूपये का निरर्थक व्यय किया गया है. बारनवापारा अभ्यारण  परिक्षेत्र में करोड़ों रूपये का आबंटन विभिन्न मदों में प्राप्त होते हैं अगर इन आबंटनो का ईमानदारी से सदुपयोग हो तो बहुत अच्छा वनों का विकास हो सकता है पर मौके में जाकर देखने से व्यय की गई राशि और कार्य में जमीन आसमान का अंतर नजर आता है छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो का एक थाना बारनवापारा अभ्यारण में खोला जाना चाहिए जिससे कि बारनवापारा अभ्यारण में हो रहे घपलेबाजी पर एफ.आई.आर. कर चालानी कार्यवाही हो सके.

वन मंडल - राजनांदगॉव में मुख्यमंत्री बाँस बाड़ी योजना पूरी तरह असफल हो गया, वन मंडल - राजनांदगॉव के कैशबुक को जानबुझकर अपठनीय स्थिती में लिखा जाता है जिससे की राज फास ना हो जावे,

जैसे की प्रमाणक क्रमांक 23, दिनांक 7 – 6 – 2017 में 4542.00 रुपए जो सामाग्री खरीदी बताया गया है वो स्पष्ट नही है केशबुक को पढ़ कर सब कुछ समझ आ जाना चाहिए की प्रमाणक क्रमांक 23, दिनांक 7 – 6 – 2017 में 4542.00 से क्या और क्यों खरीदा गया हैं, मगर जानबुझ केशबुक में बारीक पेन से छोटे – छोटे अक्षर में लेख किया जाता है और पी.सी.सी.एफ.के अधिकारी भी कोई कार्यवाही के लिए नही लिखते हैं,

इसी प्रकार के हजारो प्रमाणको को वन मंडल – राजनांदगॉव ने अस्पष्ट लिखा हैं जिसका विवरण निम्म हैं .

1.प्रमाणक क्रमांक 24 , दिनांक 7 – 6 – 2017 में 16,671.00 रुपए

2.प्रमाणक क्रमांक 26 , दिनांक 7 – 6 – 2017 में 2500.00 रुपए

3.प्रमाणक क्रमांक 27 , दिनांक 7 – 6 – 2017 में 6000.00 रुपए

4.प्रमाणक क्रमांक 28 , दिनांक 7 – 6 – 2017 में 4800.00 रुपए

5.प्रमाणक क्रमांक ( अस्पष्ट ) , दिनांक ( अस्पष्ट ) में 157200.00 रुपए ( जो पेज नंबर 166 में - प्रमाणक क्रमांक 34 , दिनांक 19 – 6 – 2017 के पहले )

6.प्रमाणक क्रमांक 34 , दिनांक 19 – 6 – 2017 में 31,266 .00 रुपए

7.प्रमाणक क्रमांक 50 , दिनांक 19 – 6 – 2017 में 136,957.00 रुपए

8.प्रमाणक क्रमांक 51 , दिनांक 19 – 6 – 2017 में 1,69,446.00 रुपए

9.प्रमाणक क्रमांक 53 , दिनांक 19 – 6 – 2017 में 75,674 .00 रुपए


जिस प्रकार औषधी खेती, रतनजोत , नीलगिरी और अब मुख्यमंत्री बांस बाडी योजना भी पूरी तरफ फेल हो गई . योजनाओ की राशि को बन्दर बाट कर लेते हैं, हमने अनेक हिग्राहियो से बात की तो अनेक सवाल उठ रहे है की आखिर कहा गये .

मुख्यमंत्री बांस बाडी योजना के हितग्राही और कहा गया मुख्यमंत्री बांस बाडी योजना के दवाई और निदाई का पैसा , मगर इसकी जाँच करेगा कौन वो जो आबंटन के नाम से कमीशन खाता है यो वो जिसने स्वयं ये खेल वन विभाग का भाग्यविधाता बन कर करवा रहा है

लोकतंत्र में सबसे ताकतवर जनता जो की सब कुछ जानती हैं. इसीलिय हम जनता जनार्धन को बता रहे हैं, वन मंडल – राजनांदगॉव के केशबुक का हाल देखिये . -www.vafadarsaathi.com

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