पी.डब्लू.डी. के ए.आर. का मद भवनों एवं सड़कों के मरम्मत के लिए निर्धारित है परन्तु विगत कुछ वर्षों से ए.आर. के मद का उपयोग रसूखदारों के लिए पंडाल, दरी, चादर, कनात, कुर्सी, टेबल, भोजन, नास्ता,  चाय के लिए किया जा रहा है.

जिस कारण आम जनता को गड्ढे वाले सड़क में गुजरना पड़ता है जिससे कि रोज आम जनता का एक्सीडेंट और हाथ-पैर टूट रहा है अगर ए.आर. के मद के राशि का उपयोग सड़क के गड्ढे भरने में होगा तो उससे जनता को लाभ होगा.

हमने सूचना के अधिकार के तहत कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग संभाग – महासमुंद के कुछ बिलों को जनहित में सार्वजानिक कर रहे हैं जिससे जनता को पता चले कि उनके टैक्स के पैसे का किस कदर दुरुपयोग हो रहा है.

क्या यह जरुरी है कि किसी रसूखदार के सभा में ग्रीन कारपेट बिछाया जाये जबकि बिना ग्रीन कारपेट बिछाए भी सभा हो सकता है जनता को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि ग्रीन कारपेट ज्यादा जरुरी है कि रोड के गड्ढे की मरम्मत करना, लोकतंत्र में जनता के टैक्स का पैसा जनता के लिए खर्च होना चाहिए

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 200 फीट रेड कारपेट बिछाया जाता है और बिल 1000 फीट का चार्ज किया जाता है बीच के बचे राशि का उपयोग रसूखदारों के कार्यक्रम में भीड़ बढाने के लिए बस वाले को, भोजन, गुटखा, चाय, पानी और भीड़ लाने वाला बिचौलिया हजम कर जाता है नीचे लिखे बिल छत्तीसगढ़ के महान ईमानदार व्यापारियों के हैं I  

कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग संभाग – महासमुंद

  1. राम किराया भंडार, बिल नं. 239, दिनांक 15-8-2015 राशि 30,512 रूपये
  2. उजाला किराया भंडार, बिल नं. 30, दिनांक 20-02-2018 राशि 2,89,550 रूपये
  3. राम किराया भंडार, बिल नं. 338, दिनांक 25-12-2015 राशि 16,510 रूपये
  4. राम किराया भंडार, बिल नं. 318, दिनांक 28-01-2016 राशि 50,064 रूपये
  5. राम किराया भंडार, बिल नं. 319, दिनांक 28-01-2016 राशि 40,473 रूपये
  6. राम किराया भंडार, बिल नं. 332, दिनांक 02-01-2016 राशि 47,250 रूपये
  7. राम किराया भंडार, बिल नं. 334, दिनांक 02-02-2016 राशि 41,134 रूपये
  8. राम किराया भंडार, बिल नं. 294, दिनांक 28-10-2015 राशि 48,928 रूपये
  9. राम किराया भंडार, बिल नं. 299, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,478 रूपये
  10. राम किराया भंडार, बिल नं. 300, दिनांक 08-10-2015 राशि 50,380 रूपये
  11. राम किराया भंडार, बिल नं. 302, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,580 रूपये
  12. राम किराया भंडार, बिल नं. 303, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,005 रूपये
  13. राम किराया भंडार, बिल नं. 304, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,005 रूपये
  14. राम किराया भंडार, बिल नं. 305, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,860 रूपये
  15. राम किराया भंडार, बिल नं. 306, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,505 रूपये
  16. राम किराया भंडार, बिल नं. 307, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,612 रूपये
  17. राम किराया भंडार, बिल नं. 308, दिनांक 28-10-2015 राशि 49,612 रूपये
  18. राम किराया भंडार, बिल नं. 309, दिनांक 28-10-2015 राशि 48,720 रूपये
  19. समीक्षा टेन्ट हाऊस एवं रेस्टोरेंट, बिल नं. 98 दिनांक 28-10-2015 राशि 48,800 रूपये
  20. समीक्षा टेन्ट हाऊस एवं रेस्टोरेंट, बिल नं. 97 दिनांक 28-10-2015 राशि 49,852 रूपये

   

पी.डब्लू.ड़ी. के नवनिर्मित ई.एन.सी. मुख्यालय भवन नया रायपुर "" निर्माण भवन "" की सीढ़ी का हाल देखे , इनके ई.ई. पवन अग्रवाल है , जब पी.डब्लू.डी. अपने निर्माण भवन को ऐसा बनाये है तो रोड और भवन का क्या हाल होगा, इसकी कल्पना की जा सकती हैं |

ये विद्वान इंजी. प्रभात सक्सेना के देख – रेख में बना हैं विद्वान इंजी. प्रभात सक्सेना के इतिहास व भूगोल के जानकर बताते हैं की प्रभात सक्सेना अपने पापा जी के बदले अनुकम्पा नियुक्ति में सहायक ड्राफ्टमेंन के पद से पी.डब्लू.डी. में नौकरी पाए फिर अचानक उसे सबइंजीनियर के पद में प्रमोशन हो गया ,

फिर वो सबइंजीनियर से एस.डी.ओ.बन गए जबकि कुछ लोग उनके सहायक ड्राफ्टमेंन से एस.डी.ओ.तक के सफर को लेकर सवाल उठाते हैं कुछ लोगो का कहना है की विद्वान इंजी. प्रभात सक्सेना के पास आज की दौर में सबसे ज्यादा काम हैं, इनके सब डीवीजन में सबसे ज्यादा मलाईदार कार्य है और ये लगभग 12 साल से रायपुर में पद्स्थ हैं. अगर दुसरे एस.डी.ओ. के पास 1 कार्य होगा तो विद्वान इंजी.प्रभात सक्सेना के पास लगभग 5 – 7 गुना कार्य होगे |

विद्वान इंजी.प्रभात सक्सेना के शासकीय गाड़ी के लाग बुक को हम जनता – जनार्दन के सामने रख रहे है देखे और पढ़ कर बताये, कुछ जानकारों का कहना है की तो विद्वान इंजी.प्रभात सक्सेना ने जानबूझ कर अस्पष्ट लिपि में शासकीय गाड़ी के लाग बुक लेख किया हैं, हम उसे जनहित में सार्वजनिक कर रहे हैं

जब पी.डब्लू.डी. मंत्री रविन्द्र चौबे थे फिर तरूण चटर्जी , बृजमोहन अग्रवाल , राजेश मूणत या कोई भी हो. हमेंशा विद्वान इंजी. प्रभात सक्सेना रायपुर में रहे हैं लोग कहते है. विद्वान इंजी. प्रभात सक्सेना अपनी पोस्टींग का आदेश अपने घर में टाईप कर सिर्फ हस्ताक्षर करवाने जाते हैं |

कुछ लोग तो यहाँ तक कहते है की जब अजित जोगी मुख्यमंत्री थे तो उनके पुत्र अमित जोगी के विद्वान इंजी. प्रभात सक्सेना खास मित्र थे और उस समय के ई.एन.सी.श्री जी.के.सोंलकी ने इनका तबादला कही और कर दिया था तो ये तबादला आदेश को लेते ही भडक गए और सीधा कहा की अब आप स्वयं मेरा तबादला रद्द कर वापस लाकर दोगे और हुवा भी |

पी.डब्लू.डी. रायपुर डिविजन – 3 में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 का बुरा हाल हैं गत माह मेरे 4 प्रकरण में बिना प्रमाणित किये जानकारी पंहुचा कर पल्ला झाड़ दिये और फिर बाद में उसी जानकारी को निशुल्क देना पड़ा जिस कारण पी.डब्लू.डी.का कितना कीमती समय व्यर्थ हुवा हैं, पी.डब्लू.डी.में जानबूझकर शासकीय गाड़ी का लाग बुक नही भरा जाता हैं और भरते भी है तो ऐसा जिसे कोई पढ़ ना सके. जैसे की हमने अभनपुर - कोलर – टेकरी मार्ग में उच्च अधिकारियो के द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन की जानकारी चाही तो किसी ने भी निरीक्षण प्रतिवेदन जारी नही किया हैं. जिस कारण अभनपुर - कोलर – टेकरी मार्ग की हालत बहुत ख़राब हैं,

तभी तो कुछ सबइंजीनियर 40 हजार की सेलरी में वी.आई.पी. की लाईफ स्टाईल जी रहे है | वैसे भी पी.डब्लू.ड़ी. में परदेशियावाद हावी है मूल छत्तीसगढ़िया सबइंजीनियर को अपमानित करना और चमचागिरी के मजबूर करना पी.डब्लू .डी. के कुछ लोगो की फितरत में हैं |

जो व्यक्ति रोज पी.डब्लू.डी.के भाग्य विधाता के चौखट में नाक रगडता है हैं उसका दिन दुगुना रात चौगुना तरक्की होना तय है |
कुछ तो ऐसे लिपिक हैं जो की 20 साल से अधिक एक डीवीजन में रह कर करोडो के मलिक है और रायपुर में भव्य कई बंगला हैं |

पी.डब्लू.डी.में अब भावना, खुद्दारी की कोई कीमत नही है जो लोग अपने भावना, खुद्दारी को होटल में छोड़ कर आ जाते हैं वो भी चमचागिरी का तमगा पाने उनसे क्या शराफत की उम्मीद करते है.
पी.डब्लू.डी. के किन – किन लोगो ने क्या – क्या किस किस को सप्लाई किया हैं ये जग जाहिर हैं .

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